Military Civil Fusion Abhiyan | दक्षिणी कमान का ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूजन अभियान’ : बहु-एजेंसी समन्वय से राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारी मजबूत
पुणे : Military Civil Fusion Abhiyan | दक्षिणी कमान (Southern Command) ने अपने कार्यक्षेत्र में ‘सैन्य-नागरिक संलयन अभियान’ (Military Civil Fusion Abhiyan) के तहत व्यापक गतिविधियां आयोजित कीं। इस पहल के माध्यम से सशस्त्र बल, नागरिक प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां, शैक्षणिक संस्थान और उद्योग जगत को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय सुरक्षा की समेकित तैयारी को मजबूत किया गया।

महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित इस अभियान ने भारतीय सेना (Indian Army) के ‘Whole-of-Nation’ दृष्टिकोण को और सुदृढ़ किया। इसका उद्देश्य विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाना, बेहतर तालमेल स्थापित करना और जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की सामूहिक क्षमता विकसित करना रहा।
इस अभियान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, राज्य पुलिस, नागरिक प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियां, हवाई अड्डा एवं नागरिक उड्डयन विभाग, वन और खनन विभाग, एनसीसी, शिक्षण संस्थान और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संयुक्त प्रयासों से आंतरिक सुरक्षा, एयरस्पेस निगरानी, संकट प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया और तकनीकी निगरानी जैसे क्षेत्रों में एकीकृत योजना की प्रभावशीलता साबित हुई।
पुणे स्थित मुख्यालय में मल्टी-डोमेन खतरों के आकलन हेतु उच्चस्तरीय टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ (Lt Gen Dhiraj Seth, PVSM, UYSM, AVSM, General Officer Commanding-in-Chief, Southern Command) ने की। इसमें महाराष्ट्र सरकार, रेलवे और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इसके अलावा पुणे के औंध मिलिट्री स्टेशन में संयुक्त अभ्यास, भोपाल में काउंटर-यूएएस संगोष्ठी, बाबिना में संयुक्त गश्त और निगरानी गतिविधियां, चेन्नई में सुरक्षा सम्मेलन तथा बेलगावी, हैदराबाद, जोधपुर और जैसलमेर में विभिन्न समन्वय कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस पहल की खास बात यह रही कि सभी एजेंसियां एक साझा उद्देश्य के साथ एकजुट होकर कार्य करती नजर आईं। इससे आपसी विश्वास बढ़ा, सूचना आदान-प्रदान बेहतर हुआ और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हुई।
आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना अकेले संभव नहीं है, यह अभियान स्पष्ट करता है। सेना और नागरिक तंत्र के बीच मजबूत साझेदारी ही भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सक्षम, लचीला और समन्वित बना सकती है।
