Nirupa’s Yeola Paithani & Silk Sarees Pune outlet | पुणे में निरूपा का बड़ा विस्तार, भांडारकर रोड पर खुला पहला विशाल येवला पैठणी और रेशमी साड़ियों का विक्रय केंद्र

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Nirupa’s Yeola Paithani & Silk Sarees Pune outlet | Nirupa’s Yeola Paithani & Silk Sarees Pune Outlet | 'Nirupa’s Yeola Paithani & Silk Sarees' has opened a store on Bhandarkar Road for customers in Pune.

6,000 से 7,000 वर्ग फुट में सजा भव्य प्रदर्शनी कक्ष, 2 हजार रुपये से 7 लाख रुपये तक की साड़ियों का विशाल संग्रह

पुणे : Nirupa’s Yeola Paithani & Silk Sarees Pune outlet | ठाणे में लाखों ग्राहकों का विश्वास हासिल करने के बाद येवला पैठणी की प्रमुख संस्था निरूपा की येवला पैठणी एवं रेशमी साड़ियों ने अब पुणे में भी कदम रख दिया है. संस्था ने शहर के भांडारकर रोड पर 6,000 से 7,000 वर्ग फुट क्षेत्र में अपना पहला विशाल विक्रय केंद्र शुरू किया है.

नए प्रदर्शनी कक्ष का हाल ही में राज्यसभा सांसद प्रोफेसर डॉक्टर मेधा कुलकर्णी के हाथों उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर संस्थापिका निरूपा तायडे, उनकी मां वंदना वजारे, अखिल भारतीय चलचित्र महामंडल के अध्यक्ष मेघराज राजेभोसले, ईशम तायडे, दिलीप खैरे, धीरज वजारे, गणेश डोके, महेश गायकवाड़, योगिता गायकवाड़, तुषार खैरे, सारंग मगर, वैशाली डोके और रोहित डोके सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

कुलकर्णी ने प्रदर्शनी कक्ष में रखी गई साड़ियों की कारीगरी और डिजाइनों की सराहना की. उन्होंने पारंपरिक हथकरघा कारीगरों को सहयोग देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

कुलकर्णी ने कहा, “इस प्रकार की पहल के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देना सराहनीय है. केंद्र सरकार हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने और पारंपरिक कारीगरों को सहयोग देने के लिए लगातार काम कर रही है. साड़ी बुनाई एक ऐसी कला है, जिसका भारतीय महिलाओं और हमारी सांस्कृतिक विरासत से गहरा संबंध है. रेलवे स्टेशनों पर वस्त्र विक्रय केंद्रों और स्थानीय स्तर पर तैयार हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री के लिए स्थान उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल पारंपरिक कलाओं और उनसे जुड़े लोगों की आजीविका को संरक्षित रखने में मदद कर सकती है. साथ ही इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ये पारंपरिक कौशल आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचें.

तायडे ने बताया कि पुणे के इस प्रदर्शनी कक्ष में असली येवला पैठणी और रेशमी साड़ियों का विस्तृत संग्रह उपलब्ध है. यहां करीब 2,000 रुपये की हथकरघा साड़ियों से लेकर 7 लाख रुपये तक की विशेष और महंगी साड़ियां उपलब्ध हैं.

तायडे ने कहा, “पारंपरिक येवला पैठणी के साथ हमारे संग्रह में बनारसी, रेशमी और पटोला साड़ियां भी शामिल हैं. ग्राहक बारीक जरदोजी और मोती की कारीगरी वाली साड़ियों का भी चयन कर सकते हैं. पुणे में यह हमारा पहला विक्रय केंद्र है और हमें खुशी है कि हम येवला की पारंपरिक कारीगरी को पुणे शहर तक लेकर आए हैं.”

अभिनेत्री प्राजक्ता माली निरूपा की प्रचार दूत हैं. निरूपा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली, जब प्राजक्ता माली ने कान चलचित्र महोत्सव के लाल कालीन पर निरूपा की साड़ी पहनकर उपस्थिति दर्ज कराई.

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